यूलिया स्वेरिदेंको के इस्तीफे ने यूक्रेन की राजनीति में क्यों मचाया है हड़कंप

यूलिया स्वेरिदेंको के इस्तीफे ने यूक्रेन की राजनीति में क्यों मचाया है हड़कंप

यूक्रेन में युद्ध सिर्फ सीमाओं पर ही नहीं, बल्कि सत्ता के गलियारों में भी लड़ा जा रहा है। 14 जुलाई 2026 को कीव की संसद (वेर्खोव्ना राडा) में जो कुछ हुआ, उसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यूक्रेन की प्रधानमंत्री यूलिया स्वेरिदेंको ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और संसद ने इस पर अपनी अंतिम मुहर भी लगा दी है।

युद्ध के इस नाजुक दौर में सरकार का इस तरह गिरना केवल एक सामान्य प्रशासनिक फेरबदल नहीं है। इसके पीछे राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की की नई राजनीतिक रणनीति, राजदूत पदों को लेकर मची खींचतान और देश के भीतर गहराता आर्थिक संकट छिपा हुआ है।


यूलिया स्वेरिदेंको के इस्तीफे के बाद यूक्रेन का संकट

संसद में यूलिया स्वेरिदेंको के इस्तीफे के पक्ष में 258 सांसदों ने मतदान किया। बहुमत के लिए केवल 226 वोटों की जरूरत थी, लेकिन यह आंकड़ा उससे कहीं आगे निकल गया। हैरान करने वाली बात यह है कि इस इस्तीफे के खिलाफ सिर्फ एक सांसद ने वोट डाला, जबकि 5 सांसदों ने मतदान से दूरी बनाए रखी और 47 सांसदों ने वोट ही नहीं किया।

जैसे ही मतदान खत्म हुआ और स्वेरिदेंको ने अपना विदाई भाषण पूरा किया, कीव में हवाई हमले का सायरन गूंज उठा। सांसदों को तुरंत बंकरों में शरण लेनी पड़ी। यह घटना अपने आप में बयां करती है कि यूक्रेन किस तरह के खौफनाक माहौल के बीच अपनी सरकार चला रहा है।

स्वेरिदेंको ने जुलाई 2025 में डेनिस श्मिहल की जगह प्रधानमंत्री का पद संभाला था। लगभग एक साल के इस कार्यकाल में उन्होंने बेहद कठिन परिस्थितियों में काम किया। लेकिन युद्ध के मैदान में बदलते समीकरणों और देश की चरमराती व्यवस्था ने उन्हें पद छोड़ने पर मजबूर कर दिया।


इस्तीफा मजबूरी था या राष्ट्रपति जेलेंस्की की कोई बड़ी चाल

इस इस्तीफे को लेकर यूक्रेन के राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं गर्म हैं। राष्ट्रपति जेलेंस्की का कहना है कि यह इस्तीफा देश की "अपडेटेड राजनीतिक रणनीति" का हिस्सा है। जेलेंस्की अपनी सरकार को अधिक आक्रामक और परिणाम-उन्मुख बनाना चाहते हैं। लेकिन पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और ही इशारा करती है।

सूत्रों के मुताबिक, जेलेंस्की चाहते थे कि यूलिया स्वेरिदेंको प्रधानमंत्री का पद छोड़कर अमेरिका में यूक्रेन की नई राजदूत का जिम्मा संभालें। वह वहां ओल्गा स्टेपानिशिना की जगह लेने वाली थीं, जिन्होंने व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा दे दिया था। अमेरिका से सैन्य और आर्थिक मदद जारी रखने के लिए जेलेंस्की को वाशिंगटन में एक बेहद मजबूत और भरोसेमंद चेहरे की जरूरत थी।

लेकिन स्वेरिदेंको ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। कीव की स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने साफ कर दिया कि वह अमेरिका में राजदूत बनने के मूड में नहीं हैं। इस इनकार के बाद उनके पास प्रधानमंत्री पद पर बने रहने का नैतिक आधार नहीं बचा था, क्योंकि राष्ट्रपति के साथ उनके मतभेद सार्वजनिक हो चुके थे।

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भ्रष्टाचार के आरोप और विपक्ष का तीखा वार

स्वेरिदेंको के कार्यकाल के दौरान यूक्रेन की सरकार को कई बड़े भ्रष्टाचार के मामलों का सामना करना पड़ा। हालांकि खुद स्वेरिदेंको पर सीधे तौर पर कोई आरोप नहीं लगा, लेकिन विपक्ष ने उन पर सरकारी महकमों में सफाई न कर पाने का आरोप लगाया।

संसद में विपक्ष के सांसद ओलेक्सी होंचारेंको ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि कोई भी यह साफ-साफ नहीं बता पा रहा है कि आखिर इस सरकार को बर्खास्त क्यों किया जा रहा है। वहीं होलोस पार्टी के सांसद यारोस्लाव ज़ेलेज़न्याक ने सरकार के दावों की हवा निकालते हुए कहा:

"हमसे हर दिन नतीजों का वादा किया जाता था। सरकार ने अपना वादा निभाया भी है—हर दिन नए प्रेजेंटेशन, हर दिन नई कॉन्फ्रेंस और हर दिन भ्रष्टाचार के मामले में एक नया संदिग्ध सामने आता था।"

इस राजनीतिक घमासान ने यह साबित कर दिया है कि युद्ध के बावजूद यूक्रेन के भीतर आंतरिक राजनीति और सत्ता की जंग बेहद आक्रामक हो चुकी है।


आने वाले सर्दियों के मौसम की सबसे बड़ी चुनौती

अपने आखिरी भाषण में यूलिया स्वेरिदेंको ने देश को आने वाले सबसे बड़े खतरे के प्रति आगाह किया। उन्होंने कहा कि आने वाली सर्दियों में यूक्रेन के सामने बिजली और गैस संकट का सबसे बड़ा पहाड़ खड़ा होने वाला है। रूस लगातार यूक्रेन के पावर ग्रिड और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना रहा है।

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यूक्रेन की अर्थव्यवस्था को युद्ध के बीच जिंदा रखना बेहद मुश्किल काम रहा है। स्वेरिदेंको के इस्तीफे के साथ ही पूरी कैबिनेट का इस्तीफा भी खुद-ब-खुद हो गया है। अब जब तक नई सरकार का गठन नहीं हो जाता, तब तक सभी मंत्रियों को कार्यवाहक मंत्री के रूप में काम करना होगा।


अब आगे क्या होगा

संसद अब बहुत जल्द नए प्रधानमंत्री और कैबिनेट के नाम पर मुहर लगाने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, राज्य की तेल और गैस कंपनी 'नाफ्टोगाज़' के प्रमुख सेरही कोरेत्स्की को नया प्रधानमंत्री बनाया जा सकता है। जेलेंस्की ने कोरेत्स्की और रक्षा मंत्री मिखाइलो फेडोरोव के साथ बैठकें भी शुरू कर दी हैं।

नए प्रधानमंत्री के सामने चुनौतियां बेहद गंभीर हैं:

  • सबसे पहले चरमराते बिजली संकट को दूर करना।
  • पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका से लगातार सैन्य और वित्तीय सहायता सुनिश्चित करना।
  • सरकारी विभागों में फैले भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना ताकि विदेशी मदद का रास्ता बंद न हो।

यूक्रेन इस समय दोहरे मोर्चे पर लड़ रहा है। एक तरफ सीमा पर रूसी सेना का दबाव है, तो दूसरी तरफ अंदरूनी प्रशासनिक अस्थिरता। यूलिया स्वेरिदेंको का जाना जेलेंस्की के लिए एक बड़ा जुआ है। अगर नया प्रधानमंत्री तुरंत कमान संभालकर नतीजे नहीं दे पाया, तो यूक्रेन के लिए आने वाली सर्दियां न केवल ठंडी, बल्कि बेहद अंधकारमय साबित हो सकती हैं।

AC

Aaliyah Cole

With a passion for uncovering the truth, Aaliyah Cole has spent years reporting on complex issues across business, technology, and global affairs.