ओमान के पास समंदर में तेल के जहाजों पर हमले के बाद बढ़ता असली खतरा

ओमान के पास समंदर में तेल के जहाजों पर हमले के बाद बढ़ता असली खतरा

खाड़ी देशों में सुरक्षा की स्थिति अब उस मोड़ पर आ चुकी है जहां एक छोटी सी चिंगारी भी वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला सकती है। ओमान के पास समंदर में तेल के जहाजों पर मिसाइल से जो हमले हुए हैं, वे केवल दो देशों की आपसी लड़ाई नहीं हैं। यह सीधे तौर पर आपकी जेब और दुनिया भर के एनर्जी सप्लाई चेन पर किया गया हमला है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और ओमान के समुद्री इलाके में जिस तरह से कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाया जा रहा है, उसने पूरी दुनिया के होश उड़ा दिए हैं। इस पूरे मामले को सिर्फ एक सामान्य जंग की तरह देखना सबसे बड़ी भूल होगी। इसके पीछे गहरे भू-राजनीतिक समीकरण काम कर रहे हैं जिन्हें समझना हर किसी के लिए जरूरी है।

यह संकट अचानक पैदा नहीं हुआ। पिछले कुछ हफ्तों में तनाव चरम पर पहुंच गया है जब ओमान के मसीराह और होर्मुज के आसपास के इलाकों में मिसाइलों और ड्रोन बोट्स से जहाजों पर हमले किए गए। इनमें कई जहाजों पर भारतीय नाविक भी सवार थे, जिन्हें ओमान की नौसेना और भारतीय रक्षा एजेंसियों की मदद से सुरक्षित निकाला गया। लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर इन हमलों के पीछे कौन है और इसका अंतिम नतीजा क्या होने वाला है?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बारूद की गंध और ग्लोबल सप्लाई चेन का संकट

दुनिया का लगभग एक-तिहाई कच्चे तेल का व्यापार इसी संकरे रास्ते से होता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक ऐसा जलडमरूमध्य है जो ओमान और ईरान के बीच स्थित है। अगर यह रास्ता कुछ दिनों के लिए भी बंद हो जाता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। मौजूदा हमलों ने इसी नस पर चोट की है।

तेल के जहाजों को निशाना बनाने का सीधा मकसद दबाव बनाना है। हालिया हमलों में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) और कमर्शियल तेल टैंकरों को निशाना बनाया गया है। जब किसी टैंकर पर मिसाइल गिरती है, तो केवल एक जहाज को नुकसान नहीं होता। समंदर में चलने वाले सैकड़ों जहाजों का बीमा प्रीमियम रातभर में बढ़ जाता है। शिपिंग कंपनियां इन रास्तों से अपने जहाजों को भेजने से कतराने लगती हैं। इसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ता है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी मात्रा में खाड़ी देशों पर निर्भर हैं।

क्यों ओमान का समुद्री क्षेत्र ही चुना गया

ओमान ऐतिहासिक रूप से मध्य पूर्व में एक मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। उसने हमेशा अमेरिका और ईरान के बीच शांतिदूत बनने की कोशिश की है। इसके बावजूद ओमान के तट के पास हमले होना यह दिखाता है कि अब कोई भी क्षेत्र सुरक्षित नहीं बचा है। हमलावरों ने जानबूझकर इस शांत क्षेत्र को चुना ताकि यह संदेश दिया जा सके कि खाड़ी का कोई भी कोना उनकी पहुंच से दूर नहीं है।

ओमान के मसीराह तट के पास पलाऊ देश के झंडे वाले टैंकर “एमटी मैरिवेक्स” पर मिसाइल हमला इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। इस जहाज पर 24 भारतीय नाविक मौजूद थे। हमले के तुरंत बाद मुंबई के मैरीटाइम रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर (MRCC) को अलर्ट भेजा गया और ओमान की नौसेना ने तत्परता दिखाते हुए सभी को सुरक्षित बचा लिया। इस घटना से साफ है कि खतरा कितना वास्तविक और कितना करीब है।

ड्रोन बोट्स और मिसाइल तकनीक का यह नया खतरनाक दौर

समंदर की इस जंग में हथियारों का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। अब सिर्फ पारंपरिक मिसाइलें ही नहीं, बल्कि मानवरहित सरफेस वेसल्स (USV) यानी ड्रोन बोट्स का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर हो रहा है। ये ड्रोन बोट्स पानी की सतह पर तैरते हुए आते हैं और सीधे जहाजों के इंजन रूम से टकराकर बड़ा धमाका करते हैं।

हाल में ओमान की खाड़ी में एक तेल टैंकर पर इसी तरह की ड्रोन बोट से हमला किया गया। धमाका इतना जबरदस्त था कि इंजन रूम में आग लग गई और वहां काम कर रहे एक भारतीय नाविक की दुखद मौत हो गई। इस तरह के आत्मघाती ड्रोन बोट्स को रडार पर पकड़ना बेहद मुश्किल होता है। ये कम लागत में तैयार होते हैं लेकिन इनका नुकसान करोड़ों डॉलर का होता है। यह तकनीक समंदर में सुरक्षा के पुराने तौर-तरीकों को पूरी तरह से बेकार साबित कर रही है।

जहाजों पर जबरन टैक्स वसूलने का नया खेल

इस पूरे विवाद में एक और हैरान करने वाला पहलू सामने आया है। ईरान की तरफ से यह मांग उठ रही है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के रास्तों को वह नियंत्रित करेगा और इसके लिए फीस या टैक्स वसूलेगा। अमेरिका और खाड़ी के अन्य देश इस मांग का कड़ा विरोध कर रहे हैं。 उनका कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र है और दशकों से चले आ रहे नियमों के खिलाफ है।

इस जिद के कारण ही तनाव और ज्यादा बढ़ गया है। जब भी कोई कमर्शियल जहाज ईरान की चेतावनियों को नजरअंदाज करता है, उस पर मिसाइल या ड्रोन से हमला कर दिया जाता है। यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी है।

भारत के लिए क्या हैं इसके मायने और बढ़ती चिंताएं

भारत इस पूरे घटनाक्रम को मूकदर्शक बनकर नहीं देख सकता। हमारे हजारों नाविक इन कमर्शियल जहाजों पर काम करते हैं। इसके अलावा हमारी अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी से आने वाले तेल पर टिका है।

जब भी मसीराह या शनास बंदरगाह के पास किसी जहाज पर हमला होता है, तो भारत सरकार की चिंताएं बढ़ जाती हैं। एमटी जलवीर और GFS गैलेक्सी जैसे जहाजों पर हुए हमलों ने भारतीय विदेश मंत्रालय को सख्त रुख अपनाने पर मजबूर किया है। भारत ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

भारतीय नौसेना लगातार इस इलाके में गश्त बढ़ा रही है। मुंबई में स्थित MRCC चौबीसों घंटे खाड़ी के समुद्री क्षेत्र पर नजर रख रहा है। लेकिन केवल रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना इस समस्या का स्थाई समाधान नहीं है। जब तक खाड़ी देशों में राजनीतिक स्थिरता नहीं आती, तब तक भारतीय नाविकों की जान पर यह तलवार लटकती रहेगी।

आगे की राह और उठाए जाने वाले जरूरी कदम

इस वैश्विक संकट से निपटने के लिए अब कागजी बयानों से आगे बढ़ना होगा। समुद्री सुरक्षा को लेकर एक नया अंतरराष्ट्रीय टास्क फोर्स बनाने की जरूरत है जो इन संकरे समुद्री रास्तों पर पेट्रोलिंग कर सके।

  • शिपिंग कंपनियों को अपने जहाजों में एंटी-ड्रोन तकनीक और एडवांस रडार सिस्टम इंस्टॉल करने होंगे ताकि पानी की सतह पर आने वाले खतरों को पहले ही भांपा जा सके।
  • अंतरराष्ट्रीय कम्युनिटी को एकजुट होकर उन ताकतों पर दबाव बनाना होगा जो इन कमर्शियल रूटों का इस्तेमाल अपने राजनीतिक फायदे के लिए कर रही हैं।
  • भारत को ओमान और अन्य खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों के साथ मिलकर एक सेफ कॉरिडोर बनाने पर काम करना चाहिए ताकि भारतीय क्रू और कार्गो को सुरक्षित निकाला जा सके।

सुरक्षा के मोर्चे पर जरा सी भी ढिलाई पूरी दुनिया को एक बड़े आर्थिक संकट में धकेल सकती है। अब समय आ गया है कि इन समुद्री हमलों को हल्के में लेना बंद किया जाए और इनके खिलाफ सख्त से सख्त कदम उठाए जाएं।

LP

Logan Patel

Logan Patel is known for uncovering stories others miss, combining investigative skills with a knack for accessible, compelling writing.