इजरायल और हिज्बुल्लाह विवाद में दक्षिणी लेबनान का सच

इजरायल और हिज्बुल्लाह विवाद में दक्षिणी लेबनान का सच

इजरायल की सेना दक्षिणी लेबनान से वापस नहीं लौटने वाली है। यह कोई कयास नहीं बल्कि इजरायल सरकार की आधिकारिक और सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। इजरायल के वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच ने साफ कर दिया है कि जब तक हिज्बुल्लाह पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता, तब तक इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान में जमी रहेगी। इस बयान ने उन सभी अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक कोशिशों पर पानी फेर दिया है जो इस इलाके में शांति बहाली के लिए की जा रही थीं।

सच्चाई तो यह है कि इजरायल सिर्फ हिज्बुल्लाह को पीछे धकेलना नहीं चाहता, बल्कि वह उसके पूरे वजूद को मिटाने की जिद पर अड़ा है। स्मोट्रिच का ताजा बयान आर्मी रेडियो पर आया, जिसने पूरी दुनिया के रणनीतिकारों को चौंका दिया है।

सिर्फ हथियार छोड़ना काफी नहीं

आमतौर पर युद्ध विराम के लिए शर्तों में हथियारों को सौंपने या पीछे हटने की बात होती है। इजरायल इस बार इस मूड में बिल्कुल नहीं है। स्मोट्रिच ने स्पष्ट किया है कि वे सिर्फ हिज्बुल्लाह के निशस्त्रीकरण से संतुष्ट नहीं होंगे। उनका लक्ष्य हिज्बुल्लाह को पूरी तरह से समाप्त करना है।

इसका मतलब क्या है? इसका मतलब है कि हिज्बुल्लाह को लेबनान की सरकार से बाहर होना पड़ेगा। उसकी राजनीतिक ताकत को शून्य करना होगा। जब तक हिज्बुल्लाह का कोई भी राजनीतिक या सैन्य ढांचा लेबनान में मौजूद रहेगा, इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान के सुरक्षा क्षेत्र (Security Zone) से एक इंच भी पीछे नहीं हटेगी। इसमें रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाने वाला 'ब्यूफोर्ट रिज' (Beaufort Ridge) भी शामिल है।

अमेरिका और ईरान की बातचीत से दूरी

इस पूरे घटनाक्रम का एक और बड़ा पहलू है। अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में बैकचैनल बातचीत चल रही है। वाशिंगटन और तेहरान एक समझौते की ओर बढ़ रहे हैं ताकि मध्य पूर्व में तनाव कम किया जा सके। दुनिया को लग रहा था कि इस बातचीत का असर लेबनान पर भी पड़ेगा।

इजरायल ने इस भ्रम को भी तोड़ दिया है। स्मोट्रिच ने कड़े शब्दों में कहा कि इजरायल इस बातचीत का हिस्सा नहीं है। उन्होंने तो यहाँ तक कह दिया कि वे "शैतान के साथ बातचीत" नहीं करेंगे। इजरायल को अमेरिका या ईरान के किसी भी समझौते से कोई सरोकार नहीं है। उनकी सैन्य कार्रवाई पूरी तरह स्वतंत्र रूप से चलती रहेगी।

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज और सेना प्रमुख इयाल ज़मीर ने भी एक संयुक्त बयान में इसी बात को दोहराया है। इजरायल का शीर्ष नेतृत्व इस बात पर एकमत है कि देश की सुरक्षा के लिए अमेरिकी हथियारों पर निर्भरता कम करनी होगी और अपने फैसले खुद लेने होंगे।

जमीन पर क्या चल रहा है

यह सिर्फ बयानों की लड़ाई नहीं है। दक्षिणी लेबनान में इजरायली सेना लगातार हिज्बुल्लाह के उस बुनियादी ढांचे को तबाह कर रही है जिसे पिछले 15 से 20 सालों में तैयार किया गया था। इसमें जमीन के ऊपर बने बंकर और कई किलोमीटर लंबी रणनीतिक सुरंगें (Underground Infrastructure) शामिल हैं।

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मार्च 2026 से शुरू हुई इस भीषण सैन्य कार्रवाई में अब तक भारी तबाही हो चुकी है। लेबनान के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस जंग में 4,100 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और 12,000 से अधिक घायल हुए हैं। करीब 12 लाख लोग बेघर हो चुके हैं।

जमीन पर हालात कितने नाजुक हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ ही दिन पहले हिज्बुल्लाह के एक टैंक हमले में एक बटालियन कमांडर समेत चार इजरायली सैनिक मारे गए थे। इसके जवाब में इजरायली मंत्रियों ने लेबनान पर हमलों को और तेज करने की मांग की।

अब आगे क्या

इस विवाद का जल्द खत्म होना नामुमकिन लगता है। अगर आप इस क्षेत्र के घटनाक्रम पर नजर रखना चाहते हैं, तो इन मुख्य बिंदुओं को समझना जरूरी है।

  • बॉर्डर की नई परिभाषा: इजरायल 1916 के साइक्स-पिकॉट (Sykes-Picot) समझौते के तहत तय की गई सीमा को खारिज कर रहा है। उसका मानना है कि यह सीमा भौगोलिक रूप से सुरक्षित नहीं है, इसलिए वे वहां सालों तक सैन्य ठिकाने बनाकर रखेंगे।
  • कूटनीति बनाम सैन्य ताकत: वाशिंगटन में लेबनान और इजरायल के बीच पांचवें दौर की बातचीत भले चल रही हो, लेकिन जमीन पर इसका असर न के बराबर दिख रहा है।
  • अस्थिर युद्धविराम: बीच-बीच में घोषित होने वाले युद्धविराम बेहद कमजोर हैं और किसी भी बड़े हमले के बाद तुरंत टूट जाते हैं।

ग्लोबल पॉलिटिक्स की समझ रखने वालों के लिए स्पष्ट संकेत है कि मध्य पूर्व का यह मोर्चा आने वाले लंबे समय तक सुलगता रहेगा। इजरायल का रुख साफ है कि बिना हिज्बुल्लाह के खात्मे के वे पीछे हटने का कोई समझौता स्वीकार नहीं करेंगे।

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Aaliyah Cole

With a passion for uncovering the truth, Aaliyah Cole has spent years reporting on complex issues across business, technology, and global affairs.